Thursday, February 4, 2010
टाइगर बचाओ देश बचाओ!
जब कभी नन्हा शिशु रोता है तो माँ कहती अरे! रे रे शेर होकर रोता है वही बच्चा जब बड़ा होता है और जरा सी ठोकर से गिर जाता है तब भी माँ यही कहती है शेर होकर रोता है जब बचपन की नादानी में बच्चा कुछ jid कर बैठता है और माँ को डराना होता है तब भी वो यही कहती है बेटा! शेर आ जायेगा, चाहे घर हो या जंगल शेर नहीं तो बबर शेर इतना ही नहीं हिंदी सिनेमा शोले का गब्बर किसी बबर से कम नहीं थाज्यादा क्या कहे जब बीडी पीने का मन हुआ तो खुद की तारीफ्ह में कसीदे पड़कर कह दिया "शेर दिल जवानो के लिए" किसी कमजोर पर जोर आजमाइश करनी हुई तो " सीना चौडा करके चुनौती भी दे डाली! की हिम्मत है शेर से मुकाबला कर के दिखाओ, अरे जितना कहो कम है हमारे शेर तो जवा दिल शेर है प्रेमिका के तारीफों के पुल बांधने हो या अपने प्यार को सच्चा साबित करना हो तो भी शेर की सी बहादुरी दिखाकर कलेजा फ्हदकर दिखा देंगे लेकिन आज जब वाकई "शेर को बचाने की बात आई तो चले गए माँ की गोद में शाबाश मेरे लाल ! जागो और तिगर बचाओ अभियान में मुझसे हाथ milao
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