Friday, January 15, 2010

कहो कैसी कही??????????????

ऊपर से धुल गये, अन्दर से कौन धोयेगा,

तन तो शुध हो गया, मन को कौन धोयेगा॥
क्यों भई हो गया गंगा स्नान? धो दिये सारे पाप? मिल गई गुनाहों से मुकित चलो अब एक काम और कर आयें किसी डूबते का सहारा बन जायें, अच्छा चलो किसी गुद्डी के लाल को ठिठुरती ठंड में कुछ वस्त्र दें आयें,और हाँ अगर स्नान ध्यान हो गया हो तो सुगंधित वस्त्र पहन कर मित्र मंड्ली के घर की सैर कर आयें। घर पर मां राह देख रही होगी तो क्या? उसकी तो रोज की आदत है, वह एक दिन और जाग लेगी तो क्या? आखिर बेटा हूं उसका उसका भी तो कुछ ......

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