क्या हुआ जो देर से आये जब जागे है ,दुरुस्त ही जागे है!!
प्यारे मित्रों !
एक बार फिर आप सभी पाठकों को मेरा सलाम|
"जागो ग्राहक जागो" "जब जागो तभी सवेरा" "तेरी गठरी में लागा चोर मुसाफिर जाग ज़रा"
और भी न जाने कितने जुमले, कहावते, इत्यादि है| हम पढ़ते है, पढ़ाते है , जानते है और जनाते है लेकिन फिर भी अपनी आदत से बाज़ नहीं आते है|
हमने तो जैसे ठान ली है न जागे है, न जागेंगे, और न जागने देंगे,क्योंकि मेरा मानना ही की अगर जाग गए तो सारे अरमान भी जाग जायेंगे| बिला वजह की चिंता फिकर और वैसे भी जागने से क्या फायेदा?
जहाँ फायेदा न हो वहां हम न जाते है,और बिना फायेदे के न हम जागते है| सो मेरे मित्रों कहने का मतलब ये है की आजकल फायेदे के सौदे में हम व्यस्त थे इसलिए ही आप सबसे दूर थे|
"कहियेगा कैसी कही"
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