क्या पहनना है?
कब पहनना है?
क्या खाना है?
कहाँ जाना है?
कब तक आना
कब तक रहना है?
जो करना है
जब करना है ।
मुझे बताना होगा
पर, बिना मुह खोले
सब सहना होगा
हम जो बोले वो
सुनना होगा
अगर बोला ,मुह खोला
तो बहस मान ली जाएगी
तुम्हारे हिस्से की ख़ुशी
छीन ली जाएगी।
तुम्हे वही करना होगा
जो मै कहूँगा,
वही बोलना होगा,
जो मै सुनूंगा
तुम्हारे हिस्से की हंसी
मेरी हंसी में है
तुम्हारी किस्मत
मेरी मुट्ठी में है।
तुम सपने भी देखोगी
तो मेरी आँखों से,
जागोगी और सॊऒगी
तो मेरी आँखों से,
मेरे बिना तुम्हारा वज़ूद नहीं
`मै' ही मैं हूँ
तुम कुछ नहीं
याद रखना-
सागर के पार
अनंत आकाश का
जहाँ तक है विस्तार
इस पार से उस पार
यदि देखा-
`मिलेगी तुम्हे लक्ष्मण-रेखा'
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