मेरे देश में कुछ ऐसे भी लोग है .........
जो.
न जाने ख़ुद को क्या समझते है,
ख़ुद पर जब भरोसा नहीं,
तो दूसरो को ग़लत समझते है ।
उनको अब यह समझना होगा,
दूसरो के चश्मे पर नहीं,
अपनी आँखों पर,
एतबार करना होगा।
क्योंकि
जब धूमिल आवरण हटेगा,
तभी सच से सामना होगा,
तभी सच का सामना होगा।
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