नर से बड़ी है नारी
द्विवोप्पत्ति:द्व्याय्त्त्वात्सम्बन्धस्य।।55।।
सब सम्बन्ध दो या दो से अधिक वस्तुओ के बीच होते है।(वेदान्तसूत्र के अनुसार )
आचार्य पाड़ीनी के अनुसार दो वस्तुऒ के निकटतम आने का नाम संयोग है।
एक वस्तु के बीच संहिता या सम्बन्ध की कल्पना नहीं की जा सकती ।जैसे पिता -पुत्र ,स्वामी -सेवक,राजा -प्रजा,बहिन-भाई,ज्येष्ठ-कनिष्ठ पति-पत्नी आदि जितने भी सम्बन्ध है -सबके लिए कम से कम दो सत्ताऒ का होना अपेक्षित है। और दोनों सम्बन्ध सृष्टि के आरम्भ से एक दूसरे के पूरक है।तो फिर प्रश्न उठता है क़ि क्या जैविकीय आधार पर नर-नारी में भेद मान कर ही उसमे भेद किया जाता है और बड़ी ही सहजता से उसे ही उसके अधिकारो से वंचित कर दिया जाता है।मै पूछती हूँ क्यों?
प्रश्न शोचनीय ही नहीं विचारनिए भी है,कि पुरुष को जन्म देने वाली नारी को एक प्रसिद्ध दार्शनिक ने "अपूर्ण पुरुष"
की संज्ञा देते हुए कहा कि "स्त्रियाँ कुछ निश्चित गुणों के अभाव में स्त्रियाँ है।"अब समझना ये है की यहाँ कौन से गुणों की बात कही गई?
और गुणों के कम या ज्यादा होने से भेद-भाव का प्रश्न कहा से उत्त्पन हुआ? और यदि मान भी ले की स्त्रियों में कम गुण होते है तो भी स्त्री पुरुष कैसे हो सकती है?
वो भी है अपूर्ण। अगर वैदिक मान्यता पर दृष्टिपात करे तो आप स्वयं पाएंगे कि वहां बिना
पार्वती के शंकर जी अधूरे है। कहने का तात्पर्य ये है कि नारी शक्ति केबिना 'शिव भी शव के समान है'। उसी प्रकार से सीता बिना राम,लक्ष्मी
बिना विष्णु जी, तो फिर अधूरा यानि अपूर्ण कौन?
मान लिया जाये कि यही बात आप पुरुष के सन्दर्भ में भी कह सकते है तो भी मै यही कहूँगी कि दोनों एक दूसरे के पूरक है और दोनों स्वतन्त्र सत्ता। जब दोनों का ही स्वतन्त्र अस्तित्व है तो ज़ाहिर सी बात है दोनों के अधिकार भी स्वतंत्र होंगे तो मै पूछती हूँ कि ये कौन तय करेगा की ये तुम्हरा है,ये हम्ह्रारा,तुम्हारी सीमा घर की चार दीवारी है और मेरी खुला आसमान,अगर मै कमाऊंगा तो तुम बच्चो की परवरिश करोगी,मै देर रात घर से बाहर रह सकता हूँ तुम नहीं तुम औरत हो तुम अबला हो मै ही तुम्हारा संरक्षक हूँ और मै ही तुम्हारा भक्षक मै जो चाहू कर सकता हूँ तुम नहीं क्योकि तुम नारी हो और केवल पुस्तको में,साहित्य में,इतिहास में,ही भारी हो।ऐसा कह कर उसे दबाया जाता है,रास्ता दिखाने के बहाने रास्ता भटकाया जाता है।मै कहती हूँ कब तक।अब वो दिन दूर नहीं जब सतयुग वापस आएगा आदि शक्ति कहलाने वाली नारी जब दुर्गा और काली का रूप लेगी तब दो नहीं एक की ही सत्ता रहेगी।
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