यहाँ सच्चाई को और ईमानदारी को पूछता कौन है ?
जो सच है वो भगवान् है, उसे पूजता कौन है ?
यहाँ आदमी से आदमी डरा है, इस कदर
सच जानता पर ज़ुबान, खोलता कौन है ?
जो सच है वो भगवान् है, उसे पूजता कौन है ?
यहाँ आदमी से आदमी डरा है, इस कदर
सच जानता पर ज़ुबान, खोलता कौन है ?
कहने को हम भी रखते हैं ज़ुबान डेढ़ गज़ की
बोलने को हम भी बोल सकते हैं बात सबकी
लेकिन ज़नाब हमको भी परवाह है आपकी
इसीलिए हम पोल नहीं खोलते हैं, आपकी
बोलने को हम भी बोल सकते हैं बात सबकी
लेकिन ज़नाब हमको भी परवाह है आपकी
इसीलिए हम पोल नहीं खोलते हैं, आपकी
अब सोचते हैं कब तक चलेगा यह सिलसिला
जो सच है वही सच है तो काहेका फिर गिला
सच्चाई को समझिये हक़ीकत को देखिये
ये आवाम की आवाज़ है , मुहं न मोड़िये
जो सच है वही सच है तो काहेका फिर गिला
सच्चाई को समझिये हक़ीकत को देखिये
ये आवाम की आवाज़ है , मुहं न मोड़िये
ख़ुदा गवाह है जब - जब भी अँधेरा हुआ है
लेकिन उसके बाद सवेरा ही हुआ है
इसलिए रौशनी को सामने से देखिये
बीच की दीवार को हटा करके देखिये
लेकिन उसके बाद सवेरा ही हुआ है
इसलिए रौशनी को सामने से देखिये
बीच की दीवार को हटा करके देखिये
सच हमेशा सच नहीं होगा
झूट हमेशा झूट नहीं होगा
फर्क बस नज़रिए का होगा
जो आवरण का धोखा होगा ..................
झूट हमेशा झूट नहीं होगा
फर्क बस नज़रिए का होगा
जो आवरण का धोखा होगा ..................
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