Saturday, November 27, 2010

चहरे

अजी हमने कही और आपने सुनी, सुनी तो ठीक और न सुनी तो भी ठीक,
और वैसे भी" हम आपके है कौन"? अगर आप भी गांधी जी के बन्दर के एक ख़ास बन्दर है, जो सुनता नहीं तो कोई बात नहीं, कम स कम पढ़ ही लीजिये
हम तो जनाब बहुत पढ़ते है नहीं पढ़ पाते तो एक चीज़ नहीं पढ़ पाते | अरे! आपने पूछा नहीं क्या ? तो लीजिये जनाब हम खुद ही बता देते है
चेहरा हाँ जी चेहरा
अगर चेहरा पढना जानते तो फसबुक पर समय जाया क्यों करते? अब ये न पूछिएगा की हमने ऐसी क्यों कही पर खुदा कसम जो भी कही सौ फीसदी सच्ची
कही क्योकि जितनी जल्दी गिल्गितान भी रंग नहीं बदलता होगा ये अपना ढंग भी बदल लेते है और तो और जीने का ढंग भी बदल लेते है | तिलक ये जब भी
लगाते है माथा देख कर ही लगाते वरना लगाते ही नहीं| अपने बचपने में वर्णमाला सीखते समय इनोहने स-से -सच कभी नहीं सीखा होगा ये बात हम दावे के साथ
कह सकते है |कहने को तो बहुत ही सीधे साधे तरीके से हम ये "फ़िल्मी गाना की एक ----------- पर कई ----------- लगा लेते है लोग | गा कर भी अपनी भडास
निकल सकते थे पर क्या करे पढने से मजबूर है शायद इसीलिये लिखने से भी इसलिए आपके लिए भी होमवर्क छोड़ जाते है की ऊपर लिखी पंक्तियों में सही शब्द
भरो |

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