सुनो! सुनो! सुनो!
कहानी सुनो!
भारत की बेटियों की
एक की नहीं,दो की नहीं,
असंख्य दामिनियो/ बेटियों की .........
सुनो!सुनों!सुनों!
एक पुरुष -(हँसते हुए )भले ही ,
हमारे तुम्हारे
कितने भी मतभेद है
पर इस बात पर
हम सब एक है कि
हमारी जो संस्कृति है,
वह सबसे महान है,
उसमे नारी का ऊँचा स्थान है।
बोलो! बोलो! है ना,
सब-(पुरुष एक साथ ) हाँ! हाँ!
वह घर की लक्ष्मी है,
उसका काम है,वह घर संभाले
चार दीवारी के भीतर फैलाये उजाले ।
घर उसकी मर्यादा रेखा है
घर उसकी मर्यादा रेखा है ।
सब लडकियाँ-( एक साथ ).....
पर क्या आपने कभी देखा है?
मर्दों की भी कोई सीमा-रेखा है?
क्यों बेटियाँ ही हर दुःख सहें ?
क्यों कुरीतियों की बलि चढ़े ?
आइये !मेरे साथ आइये !
लक्ष्मी की कहानी,उसकी जुबानी सुनिए!
सूत्रधार-( डुगडुगी या थाली कुछ भी बजाते हुए)
हाँ! हाँ! आइये! आइये!
पुरुष-1-सुनिए काहे ! देखिये भी!
(तभी एक लड़का एक लड़की को अपनी ऒर खींचेगा, दुप्पट्टा खींचेगा और धकेल देगा ......)
लड़की रोते हुए-
मै लक्ष्मी हूँ,
घर ,परिवार के बोझ से दबी हूँ।
भाई-बहन छोटे है,
खाने के टोटे है,
बापू दारु पीते है
और बात-बात पर पीटते है
नशे में लडखडा कर जब घर आते है
हम डर कर सिहर जाते है,
बेटी होने का बोझ हमें सालता है,
मेरा ही घर मुझे काटता है,
कल तो हद हो गई,
चंद रुपयों के लिए मेरी अस्मत लुट गई .......
(सब एक साथ )-
देश हुआ शर्म सार
बेटियों पर हो रहे अत्याचार
16 दिसंबर की वो काली रात
जब एक और बेटी ने गंवाई अपनी जान .....
(कुछ लडकियाँ एक साथ )-हाँ !हाँ!
कब तक मर्द करेंगे अपनी मनमानी?
कब तक स्त्रियाँ सहेंगी उनकी तानाशाही?
(तभी भीड़ से आवाज़ आती है ......)
एक महिला-
मै एक कामकाजी महिला हूँ,
मेट्रो में सफ़र करती हूँ (कह कर अपना दुप्पट्टा हटा कर दिखाती है)
मेरे जिस्म पर ये जो नाख़ून गड़े है,
ये गिरगिट नुमा गिद्ध के पंजे है,
मेरी आत्मा को कचोटती
उन मर्दों की आँखे है,
दुस्शासन की भुजाएं है
जिनसे वह रोज़ न जाने
कितने चीर हरण करता है ।
क्या उसके लिए बनी कोई सीमा-रेखा है?(चीखते हुए बोलती है )
(लडकियाँ एक साथ)
.......हाँ!हाँ! कोई सीमा-रेखा है?
हमारे कपडे ........हमारा खाना
हमारा गाना .......हमारा बजाना
क्यों नहीं तुम्हें भाता है?
हमें सताकर बोलो?
क्या मज़ा आता है ?
कहते हो गाना-बजाना बंद करो
नहीं तो मार डालेंगे
सोंच लो !
अगर अब नहीं सुधरे तो हम सुधार देंगे
तुमसे तुम्हारी पहचान छीन लेंगे!
नारी है शक्ति का अवतार
यही है भारत के संस्कार !!!
यही है भारत के संस्कार